न्यूज़ प्रिंट हरिद्वार। तकनीकी विकास के साथ-साथ साईबर ठग लगातार ठगी के नए रास्ते खोज रहे हैं। मौजूदा दौर में विख्यात हो रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक भी इससे अछूती नही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा साइबर ठगी के दो माध्यम इन दिनों प्रचलित हैं। जिसमें डीपफेक और वॉयस क्लोनिंग शामिल है।
सामने आया वॉयस क्लोनिंग का मामला
हरिद्वार में हाल ही में शहर कोतवाली क्षेत्र की ब्रह्मपुरी बस्ती निवासी लक्ष्मी प्रसाद जोशी द्वारा कोतवाली नगर हरिद्वार में शिकायत देकर बताया गया कि उनके मोबाइल में एक अंजान नंबर से कॉल आया। जिसमें अज्ञात कॉलर द्वारा खुद का परिचय भांजे के रुप में देकर इमरजेंसी बताते हुए पीड़ित से करीब पौने दो लाख रुपये ट्रांस्फर करवा लिए।
अज्ञात कॉलर की आवाज भांजे से इस कदर मिलती-जुलती थी कि पीड़ित को बिल्कुल भी शक नही हुआ। पीड़िता को ठगी का पता तब चला जब पीड़ित ने अपने भांजे के मोबाइल नंबर पर कॉल कर बात की। वॉयस क्लोनिंग के जरीए हुए इस फ्रॉड की शिकायत मिलते ही कोतवाली नगर हरिद्वार में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की पड़ताल शुरू कर दी।
क्या होता है VOICE COLLING
कृत्रिम बुद्धिमता का उपयोग कर किसी शख्स की आवाज एवं बातचीत करने के तरीके की कॉपी करना Voice Cloning कहलाता है। ये कॉपी इतनी सटीक होती है कि इसे पहचान पाना लगभग असंभव है।
Voice Colling Fraud से खुद को कैसे बचाएं ?
अंजान नम्बर से आयी साधारण कॉल या व्हाट्सऐप कॉल का कभी भी भरोसा न करें। अगर ऐसे किसी संदिग्ध नंबर से बातचीत कर कॉलर खुद को आपका परिचित या रिश्तेदार बताकर पैसों की मांग करता है तो सावधान हो जाएं।
मामले की तस्दीक करने के लिए आपके पास मौजूद अपने रिश्तेदार के नंबर पर कॉल कर सुनिश्चित करें कि कहीं आप वॉयस क्लोनिंग ठग गिरोह के निशाने पर तो नहीं हैं। इसके साथ ही साईबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल टोल फ्री नंबर 1930 पर घटना की सूचना दें।


