न्यूज प्रिन्ट रुद्रपुर। आवासीय कॉलोनियों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने ऊधमसिंह नगर के व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। रुद्रपुर और काशीपुर समेत जिले के कई शहरों में आवासीय भवनों में दुकानें, कार्यालय और अन्य प्रतिष्ठान चला रहे कारोबारियों को अपने व्यवसाय पर संभावित कार्रवाई का डर सताने लगा है।
जिले में बड़ी संख्या में ऐसे व्यापारी हैं, जो घरों के निचले हिस्से या आवासीय कॉलोनियों में दुकानें और अन्य प्रतिष्ठान संचालित कर रहे हैं। इसके अलावा कई स्थानों पर कोचिंग सेंटर, ब्यूटी पार्लर, क्लीनिक, गोदाम और छोटे कारखाने भी चल रहे हैं। यदि नियमों के तहत कार्रवाई होती है, तो कारोबारियों को प्रतिष्ठान दूसरी जगह ले जाने के साथ अतिरिक्त खर्च और ग्राहकों को बनाए रखने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की मांग
रुद्रपुर व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय जुनेजा ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई जगह आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां साथ-साथ संचालित होती हैं। ऐसे में राज्य सरकार को व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी करनी चाहिए।
व्यापारी गौरव गांधी के मुताबिक, रुद्रपुर में सैकड़ों व्यापारी अपने घरों के निचले हिस्से में कारोबार कर रहे हैं। अचानक कार्रवाई होने पर उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष अश्वनी छाबड़ा ने भी सरकार से व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाने की मांग की। वहीं, काशीपुर के व्यापारी राजीव सेतिया ने कहा कि आदेश से कुछ क्षेत्रों में व्यवस्था सुधर सकती है, लेकिन आवासीय भवनों में कारोबार करने वाले कई व्यापारियों के सामने परेशानी खड़ी हो सकती है।
भूमि उपयोग और अनुमति की जांच जरूरी
अधिवक्ताओं का कहना है कि आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने के लिए निर्धारित नियमों और स्वीकृत भूमि उपयोग का पालन जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन प्रशासन की जिम्मेदारी है।
वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र और अमित कालड़ा ने कहा कि किसी भी प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई से पहले उसकी अनुमति और भूमि उपयोग की स्थिति की नियमानुसार जांच की जानी चाहिए।
अधिवक्ता शैलेंद्र मिश्रा ने कहा कि आदेश के दायरे में आने वाली गतिविधियों को समझना जरूरी है। उनके अनुसार, बैंक, बड़े होटल और कोचिंग सेंटर जैसी गतिविधियों के कारण आवासीय क्षेत्रों में यातायात का दबाव बढ़ सकता है।
प्रशासन के अगले कदम पर टिकी नजरें
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिले के व्यापारियों की नजर अब सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर है। कारोबारियों को आशंका है कि कार्रवाई होने पर उनके व्यवसाय और रोजगार पर असर पड़ सकता है। हालांकि, प्रत्येक प्रतिष्ठान के संबंध में निर्णय संबंधित नियमों, स्वीकृत भूमि उपयोग और आदेश के दायरे के अनुसार ही लिया जाएगा।





