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Newdelhi: रुपये में व्यापार को बढ़ावा देगा भारत, मुद्रा संकट से जूझ रहे देशों को मिलेगी राहत: निर्मला सीतारमण

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न्यूज प्रिन्ट नई दिल्ली। भारत अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ रुपये में व्यापार निपटान को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि इस पहल का उद्देश्य उन देशों की मदद करना है, जो विदेशी मुद्रा की कमी से जूझ रहे हैं। इससे इन देशों को आवश्यक वस्तुओं का आयात जारी रखने में मदद मिल सकती है।

वित्त मंत्री ने बैंकॉक, थाईलैंड में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के दौरान अटलांटिक काउंसिल के साथ बातचीत में यह बात कही। उन्होंने बताया कि भारत ऐसे देशों के साथ व्यापार जारी रखने के लिए रुपये में भुगतान की व्यवस्था को प्रोत्साहित करना चाहता है, जिन्हें विदेशी मुद्रा संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

सीतारमण के अनुसार, वैश्विक आर्थिक मंदी, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और विभिन्न देशों में जारी युद्धों ने कई अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ाया है। इसके चलते कुछ देशों को कर्ज और भुगतान संतुलन के संकट का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बहुपक्षीय विकास संस्थानों की ओर से समस्याओं के समाधान में लगने वाले समय का भी उल्लेख किया।

रुपये में व्यापार से क्या होगा फायदा?

विदेशी मुद्रा की कमी से जूझ रहे देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। रुपये में व्यापार निपटान की व्यवस्था से भारत के साथ कारोबार करने वाले ऐसे देशों को कुछ आवश्यक वस्तुओं का आयात जारी रखने में मदद मिल सकती है।

भारत की इस पहल का उद्देश्य विदेशी मुद्रा पर निर्भरता से जुड़ी बाधाओं को कम करना और व्यापारिक संबंधों को बनाए रखना है। वित्त मंत्री ने आसियान व्यापार समझौते की समीक्षा और क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) से भारत के बाहर रहने जैसे मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।

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