प्रशासन व नगर निगम की कार्रवाई के खिलाफ कलेक्ट्रेट में जोरदार प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपा
न्यूज प्रिन्ट,रुद्रपुर। खेड़ा ईदगाह मैदान पर प्रशासन और नगर निगम द्वारा की गई कथित कब्जा व सीलबंदी की कार्रवाई के विरोध में ईदगाह बचाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में ट्रेड यूनियनों और मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए कब्जा हटाने और पूर्व स्थिति बहाल करने की मांग की।
संघर्ष समिति का आरोप है कि खेड़ा कॉलोनी स्थित ईदगाह, स्कूल, मदरसा, खेल मैदान, मस्जिद, कब्रिस्तान और कर्बला से जुड़ी भूमि पर 5 दिसंबर 2025 के बाद बिना पूर्व सूचना, संवाद और पक्ष सुने जबरन कब्जा कर सीलबंदी की गई। जबकि मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। समिति ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया। प्रदर्शनकारियों के अनुसार उक्त मैदान दशकों से स्कूल और मदरसे के छात्रों के खेलकूद के लिए उपयोग में है। क्षेत्र घनी आबादी वाला होने के कारण बच्चों के लिए अन्य कोई खेल मैदान उपलब्ध नहीं है। कब्जे के बाद बच्चों का खेल का अधिकार प्रभावित हुआ है। साथ ही कब्रिस्तान की अधिकांश भूमि पर कब्जे से दफन की गंभीर समस्या उत्पन्न होने की आशंका जताई गई। समिति ने यह भी कहा कि यह स्थान सात–आठ दशकों से ईदगाह के रूप में प्रसिद्ध है, जहां ईद, बकरीद, अलविदा जुमे और उर्स जैसे धार्मिक आयोजन होते रहे हैं, जिनमें 20 से 25 हजार लोग शामिल होते हैं। नगर निगम द्वारा पहले इसी मान्यता के तहत बारात घर का निर्माण भी कराया गया था, जिसे अब सील कर दिया गया है, जिससे गरीब परिवारों को विवाह आयोजनों में परेशानी हो रही है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कब्जे के दौरान सार्वजनिक मार्गों को भी सील कर दिया गया, जिससे आम आवागमन, नमाजियों, शव यात्राओं और मुहर्रम के जुलूसों में भारी दिक्कतें पैदा हो गई हैं। इसे भविष्य में कानून-व्यवस्था के लिए संवेदनशील मुद्दा बताया गया। ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि कथित रूप से फैलाए जा रहे सांप्रदायिक उकसावे और अफवाहों पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा जिम्मेदार तत्वों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि क्षेत्र में शांति और भाईचारा बना रहे।
कब्जाई गई भूमि पर 5 दिसंबर 2025 की स्थिति बहाल कर मुस्लिम समुदाय को सौंपा जाए।
ईदगाह की संपूर्ण भूमि को अन्य धार्मिक संस्थानों की तरह निशुल्क आवंटन/पट्टा दिया जाए।
स्कूल और मदरसे के छात्रों के खेल मैदान से कब्जा हटाया जाए।
मदरसे और बारात घर के लिए आवश्यक बजट उपलब्ध कराया जाए।
सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाली गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जाये।


