पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए देहरादून में जुटे प्रदेशभर के जिला पंचायत सदस्य
बबलू पाल न्यूज प्रिंट देहरादून। प्रदेश जिला पंचायत सदस्य संगठन, उत्तराखंड की तीसरी प्रदेश स्तरीय बैठक शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष भास्कर सम्मल की अध्यक्षता में देहरादून के अजबपुर कलां स्थित अमोला मल्टीसाइंन फैमिली रेस्टोरेंट में आयोजित हुई। बैठक में प्रदेश कार्यकारिणी, जिला अध्यक्षों तथा विभिन्न जनपदों से आए जिला पंचायत सदस्यों ने संगठन को मजबूत बनाने और पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया।बैठक में सर्वसम्मति से उत्तराखंड में जिला योजना समिति (डीपीसी) के चुनाव की अधिसूचना शीघ्र जारी कर चुनाव कराने की मांग की गई।

साथ ही जिला पंचायत सदस्यों के लिए पंचायत कल्याण कोष की स्थापना कर आकस्मिक दुर्घटना अथवा निधन की स्थिति में ₹10 लाख की अनुग्रह सहायता देने का प्रस्ताव रखा गया। 16वें वित्त आयोग के तहत जिला पंचायतों के बजट में की गई 5 प्रतिशत कटौती तत्काल बहाल करने तथा जिला योजना के अंतर्गत कोटेशन कार्यों की वित्तीय सीमा ₹2.50 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।बैठक में संविधान के 73वें संशोधन के तहत पंचायतों को दिए गए सभी 29 विषयों का पूर्ण हस्तांतरण करने, हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर जिला पंचायत सदस्यों को सम्मानजनक मासिक मानदेय और भत्ते देने, पंचायतों में आरक्षण परिवर्तन (रोटेशन) की अवधि 5 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष करने तथा प्रत्येक जिला पंचायत सदस्य का ₹1 करोड़ का सामूहिक दुर्घटना बीमा कराने की मांग रखी गई। इसके अलावा नियमों के अनुरूप जिला पंचायत सदस्यों को ठेकेदारी एवं अन्य वैध व्यावसायिक गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति देने की भी मांग की गई।संगठन ने यह भी प्रस्ताव पारित किया कि सभी सरकारी कार्यक्रमों, शिलान्यास एवं लोकार्पण पट्टिकाओं पर संबंधित क्षेत्रीय जिला पंचायत सदस्य का नाम प्रोटोकॉल के तहत अनिवार्य रूप से अंकित किया जाए।

जिला स्तरीय विभागीय बैठकों में अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने, जनहित से जुड़े मामलों में 15 दिनों के भीतर कार्रवाई की व्यवस्था लागू करने तथा राज्य की सीमा के भीतर सभी राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों के टोल प्लाज़ा पर जिला पंचायत सदस्यों के निजी वाहनों को टोल टैक्स से पूर्ण छूट देने की मांग भी उठाई गई।बैठक में राज्य वित्त आयोग एवं 16वें वित्त आयोग से प्राप्त कुल बजट का कम से कम 90 प्रतिशत हिस्सा जिला पंचायत सदस्यों के माध्यम से ग्रामीण विकास कार्यों के लिए आवंटित करने, प्रत्येक विकास भवन में संगठन के लिए कार्यालय कक्ष उपलब्ध कराने तथा संगठन के पदाधिकारियों को सचिवालय प्रवेश हेतु विशेष वाहन पास और डिजिटल पहचान पत्र जारी करने की मांग भी रखी गई।बैठक में संगठन की मजबूती, सदस्यता विस्तार और सभी जनपदों के जिला पंचायत सदस्यों के बीच बेहतर समन्वय पर भी चर्चा हुई। संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि इन मांगों पर सरकार द्वारा शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय की शरण भी ली जाएगी।बैठक में प्रदेश अध्यक्ष भास्कर सम्मल, कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र सिंह रांगड़, महामंत्री अजय भंडारी, संरक्षक केसर सिंह, हुकुम भंडारी, सुरजन नारायण, संजय किशोर, संयोजक जीत सिंह रावत, उपाध्यक्ष उर्मिला बिष्ट, पंकज सिंह बोरा, बचन सिंह बिष्ट, अनुप राज कुंवर, सचिव शिशपाल सजवाण, अंजली गोस्वामी, सोशल मीडिया प्रभारी उर्मिला गजेंद्र राणा, दीक्षा नेगी सहित प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए जिला अध्यक्ष एवं जिला पंचायत सदस्य मौजूद रहे। अंत में प्रदेश अध्यक्ष भास्कर सम्मल ने पंचायत प्रतिनिधियों के सम्मान और उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने के संकल्प के साथ बैठक का समापन किया।


