Kichha: खेल बिगाड़ेंगे जक्कू या लगेंगे पार? बाहरी बनाम स्थानीय की लड़ाई में बागी बनेंगे गेमचेंजर!

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न्यूज़ प्रिन्ट, किच्छा। नगर पालिका के अध्यक्ष पद का चुनाव इस बार महज भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला नहीं है। 22 सितंबर को 52,240 मतदाता अपना नया अध्यक्ष चुनेंगे, लेकिन उससे पहले शहर की सियासत में स्थानीय बनाम बाहरी की बहस ने चुनाव को नया रंग दे दिया है। भाजपा ने संदीप अरोरा और कांग्रेस ने राजेश प्रताप सिंह पर दांव खेला है। दोनों के सामने अपनी-अपनी चुनौतियां हैं और इन्हीं चुनौतियों के बीच बागियों की मौजूदगी मुकाबले का गणित बिगाड़ सकती है। भाजपा प्रत्याशी संदीप अरोरा के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के भीतर की नाराजगी को थामने की है। टिकट को लेकर असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी यदि मतदान तक कायम रहती है तो इसका खामियाजा पार्टी प्रत्याशी को उठाना पड़ सकता है। दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह को ‘बाहरी’ बताए जाने की कोशिश से पार पाना होगा। चुनावी मैदान में उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह मतदाताओं के बीच खुद को स्थानीय और स्वीकार्य चेहरा साबित कर पाएं। इस बीच कांग्रेस से बगावत कर जीवन जोशी और अब्दुल रशीद जक्कू के चुनाव मैदान में उतर कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। दोनों अगर मैदान में डटे रहते हैं तो कांग्रेस के सामने अपने वोटों को एकजुट रखने की चुनौती होगी। खासकर जक्कू की सक्रियता चुनावी समीकरणों पर असर डाल सकती है। किच्छा में करीब 15 हजार मुस्लिम मतदाता हैं। ऐसे में मुस्लिम वोटों पर जक्कू की पकड़ को लेकर राजनीतिक दलों की निगाहें टिकी हैं। हालांकि चुनाव में किसी एक वर्ग के वोट का रुख पूरी तरह एकतरफा होगा, यह मान लेना जल्दबाजी होगी, लेकिन जक्कू की मौजूदगी कांग्रेस के लिए चिंता का कारण जरूर बन सकती है। जक्कू जितना मजबूत चुनाव लड़ेंगे, कांग्रेस के सामने वोटों के बिखराव का खतरा उतना ही बढ़ेगा। हालांकि इसका फायदा सीधे भाजपा को मिलेगा, यह भी तय नहीं है। स्थानीय समीकरण, प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ और नाराज वोटर अंतिम समय में किस ओर जाते हैं, यह चुनाव का रुख तय करेगा।

2013 का प्रदर्शन बढ़ाता है जक्कू का कद

किच्छा। जक्कू के राजनीतिक प्रभाव को समझने के लिए 2013 के निकाय चुनाव के नतीजे अहम हैं। उस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को कड़ी टक्कर देते हुए दूसरा स्थान हासिल किया था। यही पुराना प्रदर्शन इस बार उनके दावे को मजबूती देता है। यदि वह अपने पुराने जनाधार को फिर सक्रिय करने में कामयाब रहे तो मुकाबला भाजपा बनाम कांग्रेस से आगे निकलकर त्रिकोणीय भी हो सकता है।

किच्छा अध्यक्ष पद पर इन्होंने भरा पर्चा

  1. राजेश प्रताप सिंह (कांग्रेस)
  2. सन्दीप अरोरा (भाजपा)
  3. अब्दुल रशीद जक्कू (निर्दलीय)
  4. शैली फुटेला (निर्दलीय)
  5. अनिल पांडे (यूकेडी)
  6. नरेंद्र टाकुली (निर्दलीय)
  7. जीवन जोशी (निर्दलीय)
    • विजय अरोरा (निर्दलीय)
    • लवी सहगल
    • सन्दीप अरोरा ने शक्ति प्रदर्शन के साथ दाखिल किया नामांकन
    • किच्छा। नगर पालिका परिषद अध्यक्ष पद के लिए भाजपा प्रत्याशी सन्दीप अरोरा ने शुक्रवार को समर्थकों के साथ अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इससे पहले इंदिरा गांधी खेल मैदान में आयोजित सभा में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जीत का दावा किया। सभा को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने कांग्रेस पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव में पहले ही हार मान चुकी है। आरोप लगाया कि पार्टी को किच्छा में अपना प्रत्याशी तक नहीं मिला, इसलिए गांव से ऐसे व्यक्ति को मैदान में उतारा गया है जो पहले भी दो बार चुनाव हार चुका है। भाजपा प्रत्याशी सन्दीप अरोरा ने पार्टी नेतृत्व, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि भाजपा विकास और जनसेवा के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जा रही है। अरोरा ने मतदाताओं से समर्थन देने और उन्हें विजयी बनाने की अपील की। नामांकन के दौरान भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे।

राजेश प्रताप सिंह ने किया नामांकन, जीत का जताया भरोसा

किच्छा। नगर पालिका परिषद अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह ने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर चुनावी बिगुल फूंक दिया। नामांकन के बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व और विधायक तिलकराज बेहड़ का आभार जताते हुए जनता से अपने पक्ष में मतदान करने की अपील की।

राजेश प्रताप सिंह ने कहा कि वह लंबे समय से क्षेत्र की जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं और मुद्दों को उठाते रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि जनता उनके कार्यों और समर्पण को देखते हुए उन्हें अपना समर्थन और आशीर्वाद देगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विकास, जनहित और स्थानीय मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में उतरी है। जनता का सहयोग मिलने पर नगर के विकास को नई दिशा देने का प्रयास किया जाएगा। नामांकन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता और समर्थक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

13 साल किया इंतजार, बंधुआ वोटर नहीं है मुसलमान: जक्कू

किच्छा। कांग्रेस से बगावत कर नगर पालिका परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव मैदान में उतरे अब्दुल रशीद जक्कू ने शुक्रवार को समर्थकों के साथ अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन के दौरान बड़ी संख्या में समर्थकों की मौजूदगी ने उनकी ताकत का प्रदर्शन किया।

इस मौके पर उनके पुत्र जावेद मलिक जक्कू ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि परिवार ने पिछले 13 वर्षों से पार्टी के निर्णय का इंतजार किया, लेकिन न तो वर्ष 2013 में टिकट मिला और न ही इस बार मौका दिया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को खुलकर बताना चाहिए कि आखिर टिकट नहीं देने के पीछे क्या कारण रहे। जावेद ने कहा कि मुसलमान किसी भी दल के बंधुआ वोटर नहीं हैं और उन्हें हल्के में लेने की भूल नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि जनता का समर्थन उनके साथ है और वे चुनाव मैदान में अपना हक लेने के लिए उतरे हैं। अब्दुल रशीद जक्कू ने समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ेंगे और जनता के बीच जाकर अपना पक्ष रखेंगे।

भाजपा से बागी शैली फुटेला ने भरा नामांकन, महिला प्रतिनिधित्व का उठाया मुद्दा

किच्छा। नगर पालिका परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व जिलाध्यक्ष शैली फुटेला ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर चुनावी मुकाबले को नया मोड़ दे दिया है।

उन्होंने अंतिम समय में अपना पर्चा दाखिल किया। नामांकन के बाद शैली फुटेला ने कहा कि किच्छा नगर पालिका क्षेत्र में महिला मतदाताओं की संख्या लगभग पुरुषों के बराबर है, लेकिन इसके बावजूद भाजपा ने महिला नेतृत्व को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं की दावेदारी को नजरअंदाज किया गया, जिसके चलते उन्हें चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लेना पड़ा। शैली ने खुद को स्थानीय और जमीनी महिला प्रत्याशी बताते हुए कहा कि वह लंबे समय से क्षेत्र की जनता के बीच सक्रिय रही हैं। उन्होंने दावा किया कि नगर की जनता बदलाव चाहती है और उन्हें पूरा विश्वास है कि मतदाता उनके पक्ष में समर्थन देंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शैली फुटेला के मैदान में उतरने से भाजपा के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लग सकती है। ऐसे में चुनावी मुकाबले में उनके प्रभाव पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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