नई दिल्ली। अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार की मांग को लेकर अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन किया। संगठन के अनुसार देशभर से 500 से अधिक कार्यकर्ता इस प्रदर्शन में शामिल हुए।
ग्राहक पंचायत का कहना है कि सरकार ने पैकेज्ड वस्तुओं पर एमआरपी अंकित करना अनिवार्य किया है, लेकिन एमआरपी तय करने की कोई स्पष्ट सीमा या प्रभावी नियंत्रण व्यवस्था नहीं है। इसका लाभ उठाकर कई उत्पादक कंपनियां वस्तुओं पर मनमाने ढंग से एमआरपी निर्धारित करती हैं, जिससे ग्राहकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।
संगठन ने आरोप लगाया कि वर्षों से चल रही इस व्यवस्था के कारण उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान हो रहा है, जबकि इस विषय पर अभी तक कोई ठोस कानूनी सुधार नहीं किया गया है। ग्राहक पंचायत लंबे समय से एमआरपी निर्धारण प्रणाली में पारदर्शिता लाने और उचित संशोधन की मांग उठाती रही है।
इसी क्रम में संगठन ने पिछले एक माह से देशभर में जनजागरण अभियान और जन आंदोलन शुरू किया है। इसके तहत विभिन्न राज्यों में कार्यक्रम आयोजित कर उपभोक्ताओं को जागरूक किया जा रहा है।
जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री से एमआरपी व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक सुधार करने की मांग की। संगठन का कहना है कि कई उत्पादों की वास्तविक लागत और बाजार में उपलब्ध एमआरपी के बीच बड़ा अंतर देखने को मिलता है, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
धरना-प्रदर्शन के दौरान अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष नारायणभाई शाह तथा राष्ट्रीय सचिव जयंत कथीरिया ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए व्यापक जनआंदोलन चलाने की बात कही।


