न्यूज प्रिन्ट नई दिल्ली। रूस से कच्चा तेल खरीदने के मामले में भारत को अमेरिकी शुल्क की धमकी से फिलहाल राहत मिली है, लेकिन भविष्य में यह दबाव फिर बढ़ सकता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले को अस्थायी राहत बताते हुए भारत को सतर्क रहने की सलाह दी है।
जीटीआरआई के अनुसार, अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की कार्रवाई फिलहाल टाल दी है। हालांकि, इस छूट की कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है। अमेरिकी प्रशासन परिस्थितियों की समीक्षा के बाद इसे वापस ले सकता है। ऐसे में भारत के सामने ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों को संतुलित रखने की चुनौती बनी हुई है।
ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत को मिली राहत का इस्तेमाल अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत तेल खरीद के फैसले व्यावसायिक हितों, कीमतों और उपलब्धता के आधार पर ले, न कि किसी बाहरी दबाव में।
उन्होंने यह भी कहा कि अस्थायी शुल्क राहत के बदले भारत को स्थायी व्यापारिक रियायतें देने से बचना चाहिए। अमेरिका की ओर से शुल्क लगाने की धमकी देना और फिर फैसले में बदलाव करना उसकी व्यापार नीति में अनिश्चितता को दर्शाता है।
भारतीय तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी घटी
जीटीआरआई के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी जुलाई में 51 प्रतिशत थी, जो अगस्त में घटकर 44 प्रतिशत रह गई। इस दौरान भारत ने अधिक कीमतों के बावजूद अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से तेल की खरीद बढ़ाई।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के लिए तेल आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत बनाए रखना जरूरी है, ताकि भविष्य में अमेरिकी शुल्क संबंधी दबाव बढ़ने पर भी ऊर्जा जरूरतें प्रभावित न हों।
क्या है अमेरिकी आदेश?
जीटीआरआई के मुताबिक, ट्रंप ने 16 अक्तूबर को राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर कुछ प्रतिबंधों और शुल्क संबंधी कार्रवाई में छूट देने का आदेश जारी किया। इसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क का खतरा फिलहाल टल गया है।
हालांकि, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रूसी ऊर्जा की खरीद पर नजर रखेंगे। इससे संकेत मिलता है कि वाशिंगटन भविष्य में परिस्थितियों के अनुसार अपना रुख बदल सकता है और व्यापार वार्ता के दौरान शुल्क की धमकी का इस्तेमाल कर सकता है।
अमेरिका के फैसले के पीछे क्या वजह?
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, अमेरिका के फैसले के पीछे ऊर्जा बाजार और व्यापारिक हितों से जुड़ी कई वजहें हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका खुद रूसी ऊर्जा खरीदता है और दूसरी ओर रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाता है, तो उस पर दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप लग सकते हैं।
जीटीआरआई ने चीन के साथ अमेरिकी व्यापार वार्ता का भी उल्लेख किया। उसके अनुसार, चीन को शुल्क बढ़ोतरी से मिली राहत और अमेरिका के अपने ऊर्जा हितों को देखते हुए भारत को निशाना बनाना व्यापारिक बातचीत को प्रभावित कर सकता है।

भारत के सामने क्या है चुनौती?
जीटीआरआई का मानना है कि भारत को अमेरिकी नीतियों में संभावित बदलावों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति तैयार करनी चाहिए। तेल आपूर्ति के विभिन्न विकल्प बनाए रखने, कीमतों पर नजर रखने और व्यापारिक हितों की रक्षा करने से भारत भविष्य के जोखिमों को कम कर सकता है।
फिलहाल अमेरिकी फैसले से भारत को राहत जरूर मिली है, लेकिन इसे स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक दबावों से निपटना है।





