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New delhi: RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट बढ़ी, कर्जदारों की जेब पर बढ़ेगा बोझ

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आरबीआई ने बढ़ाई रेपो रेट, होम लोन की ईएमआई पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में रेपो रेट में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी का फैसला किया है। इसके साथ ही रेपो रेट 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गई है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को बैठक के फैसलों की जानकारी दी।

करीब साढ़े तीन साल बाद आरबीआई ने रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। केंद्रीय बैंक के इस फैसले का सीधा असर बैंक से जुड़े कर्ज पर पड़ सकता है। खासतौर पर होम लोन, वाहन ऋण और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की ब्याज दरों में बदलाव होने की संभावना है। इसका असर मौजूदा कर्जदारों की ईएमआई पर भी पड़ सकता है।

30 लाख के होम लोन पर करीब 476 रुपये बढ़ सकती है ईएमआई

यदि किसी ग्राहक ने 30 लाख रुपये का होम लोन 20 साल की अवधि के लिए 8.50 प्रतिशत ब्याज दर पर लिया है, तो उसकी मासिक ईएमआई करीब 26,035 रुपये बैठती है। ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद यदि बैंक इसका पूरा भार ग्राहक पर डालता है और ब्याज दर 8.75 प्रतिशत हो जाती है, तो ईएमआई बढ़कर करीब 26,511 रुपये हो सकती है।

यानी ग्राहक को हर महीने लगभग 476 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं। सालाना आधार पर यह अतिरिक्त बोझ करीब 5,712 रुपये हो सकता है।

50 लाख के कर्ज पर भी बढ़ेगा मासिक बोझ

इसी तरह 50 लाख रुपये के होम लोन पर 25 साल की अवधि और 7.50 प्रतिशत ब्याज दर के हिसाब से ईएमआई करीब 36,950 रुपये है। यदि ब्याज दर बढ़कर 7.75 प्रतिशत हो जाती है, तो मासिक किस्त करीब 37,767 रुपये हो सकती है। यानी ईएमआई में लगभग 817 रुपये प्रति माह की बढ़ोतरी संभव है।

हालांकि वास्तविक असर बैंक की ब्याज दर, लोन के प्रकार और ग्राहक की ऋण शर्तों पर निर्भर करेगा। बैंक चाहें तो ईएमआई बढ़ाने के बजाय लोन की अवधि बढ़ा सकते हैं। ऐसे में मासिक किस्त में बड़ा बदलाव न होने के बावजूद पूरी अवधि में चुकाया जाने वाला कुल ब्याज बढ़ सकता है।

कर्ज लेने वालों की बढ़ी चिंता

रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर खासतौर पर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जिनका लोन फ्लोटिंग ब्याज दर से जुड़ा है। आने वाले दिनों में बैंकों द्वारा अपनी ब्याज दरों में कितना बदलाव किया जाता है, इससे ग्राहकों की वास्तविक ईएमआई तय होगी। बड़े कर्ज लेने वाले ग्राहकों पर ब्याज दर में मामूली बढ़ोतरी का भी लंबी अवधि में बड़ा वित्तीय असर पड़ सकता है।

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