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Wednesday, March 4, 2026

कुमांऊनी लोक परपराओं को नई उर्जा देगा कुमाऊँनी भाषा सम्मेलन आयोजन की तैयारियां पूर्ण, सम्मेलन में देश भर से जुटेंगे लोग।

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न्यूज प्रिंट रुद्रपुर। उत्तराखण्ड आषा संस्थान देहरादून, कुमाऊँनी पत्रिका पहरू, कुमाऊँनी उषा, साहित्य एवं संस्कृति पधार समिति तथा संस्कृति विभाग उत्तराखण्ड के संयुक्त तत्वावधान में रुद्रपुर में हली बार आयोजित होने जा रहा राष्ट्रीय कुमाऊँनी भाषा सम्मेलन 7 से 9 नवम्बर तक जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में आयोजित किया जाएगा। इस तीन दिवसीय सम्मेलन को लेकर तैयारियां पूरी हो गयी हैं। आयोजन समिति का कहना है कि यह सम्मेलन न केवल कुमाऊँनी भाषा और साहित्य के संवर्धन में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि क्षेत्रीय संस्कृति और लोक परंपराओं की नई ऊर्जा प्रदान करेगा। सम्मेलन की जानकारी देते हुए आयोजन समिति के डॉ. एस. एम. उप्रेती, डॉ. बी.एस बिष्ट और मीडिया प्रभारी डॉ. के.सी. चंदौला ने बताया कि सम्मेलन को ऐतिहासिक और भव्य स्वरुप देने के लिए पिछले कई दिनों से तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि रुद्रपुर जैसे औद्‌योगिक शहर में कुमाऊँनी भाषा-संस्कृति पर आधारित इतना बड़ा आयोजन पहली बार हो रहा है, जिससे क्षेत्र में लोकभाषा के पुनर्जागरण का संदेश आएगा। सम्मेलम का शुभारंभ 7 नवम्बर को पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी करेंगे। उद्‌द्घाटन सत्र में कुमाऊँनी भाषा की प्राचीनता, साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक योगदान पर विस्तृत विनर्श होगा। इसी दिन भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में कुमाऊँनी भाषा को शामिल किए जाने आवश्यकता पर भी गहन चर्चा की जाएगी। साथ ही भाषा को स्कूली पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने की दिशा में टॉप सुझाव और रणनीतियाँ प्रस्तुट की जाएंगी।

पहले दिन के दूसरे सत्र में कुमाऊँनी लोक साहित्य, संगीत, कला, लोक वाट्य, रंगलंच, सिनेमा और सोशार मीडिया की भूमिका पर परिचर्चा होगी। इस दौरान विभिन्न वि‌द्यालयों के छात्र-छात्राएं और लोक कलाकार कुमाऊँनी संस्कृति पर आधारित आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे, जिससे दर्शक पहाड़ की असली झलक देख सकेंगे। दूसरे दिन 8 नवम्बर को कुमाऊनी भाषा के मानकीकरण पर विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला में भाषा के उच्चारण, लिपि और शब्दावली के एकरूपता पर चर्चा के साथ ही आवी पोढ़ी तक इसे सहज रूप से पहुँचाने के उपाय सुझाए जाएंगे। इसके साथ ही उसी दिन एक अव्य कवि सम्मेलन भी होगा, जिसमें कुमाऊँनी और हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से लोकभाषा की समृद्ध परंपरा को जीएल करेंगे। 9 नवंबर को अंतिम दिन सम्मेलन का समापन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पुरस्कार वितरण समारोह के साथ किया जाएगा। इस अवसर पर देशभर से आए कुमाऊँनी साहित्यकारों, कलाकारों और नमाजिक कार्यकर्ताओं को आषा, साहित्य, लोकसंस्कृति और समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्माधित किया जाएगा। मीडिया प्रभारी डॉ. के.सी. चंदौला में कहा कि स्टूपुर में पहली बार आयोजित हो हा यह सम्मेलन अपने आप ने ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने बताया कि यह आयोजन कुमाऊँनी भाषा के संरक्ष, संवर्धन और प्रसार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। सम्मेलन का उ‌द्देश्य भाषा को न केवल संवाद का मायम बनाना है, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक बनाना भी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन कुमाऊँनी भात को उसके योग्य स्थान दिाराने और आने वाली पीढ़ियों में भाषाई गौरव की आवना जगाने में नई दिशा प्रदान करेगा।

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