- कांग्रेस विधायक ने सरकार पर दोहरी नीति अपनाने का लगाया आरोपकिसानों को खाद, वर्ग-4 की भूमि और स्मार्ट मीटर के मुद्दे भी उठाए रुद्रपुर।किच्छा से कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ ने राज्य सरकार द्वारा वन भूमि एवं आबादी क्षेत्रों को राजस्व ग्राम का दर्जा और मालिकाना हक देने के लिए गठित मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल कुछ चुनिंदा क्षेत्रों को शामिल किया है, जबकि प्रदेश में ऐसे अनेक गांव और बस्तियां हैं, जहां लोग वर्षों से निवास कर रहे हैं और उन्हें भी समान अधिकार मिलने चाहिए।जारी प्रेस विज्ञप्ति में बेहड़ ने कहा कि सरकार ने नैनीताल जिले के बिंदुखत्ता तथा देहरादून के बापूग्राम, बग्घाचौवन सहित कुछ क्षेत्रों को समिति के दायरे में रखा है, लेकिन पंतनगर की संजय कॉलोनी, मस्जिद कॉलोनी, नगला खुरपिया फार्म, गूलरभोज क्षेत्र का कोपा, मुनस्यारी, किच्छा के सूर्यनगर, नजीमाबाद, धौराडाम, कोर्ट खर्रा, जसपुर का डाम क्षेत्र, भूड़ा गौरी, चंदन नगर, मोहन बोरिंग समेत कई अन्य क्षेत्रों को इसमें शामिल नहीं किया गया।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की यह नीति भेदभावपूर्ण है। उनका कहना था कि राज्य के सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलने चाहिए और जिन क्षेत्रों में लोग लंबे समय से रह रहे हैं, वहां के निवासियों को भी मालिकाना हक दिया जाना चाहिए।बेहड़ ने कहा कि किच्छा विधानसभा के तुर्का गौरी, गौरी कला सहित कई गांवों के लोगों को अब तक पट्टे नहीं मिले हैं। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे को कई बार विधानसभा में उठाने के साथ ही मुख्यमंत्री, मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को भी पत्र भेजे, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।कांग्रेस विधायक ने किसानों की समस्याओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ग-4 की भूमि का मालिकाना हक अब तक नहीं दिया गया है और संबंधित फाइलें जिला प्रशासन में लंबित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध नहीं हो रहा है तथा एक एकड़ भूमि के लिए दो से तीन कट्टे यूरिया ही दिया जा रहा है।स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि उपभोक्ताओं के बिजली बिल दो से तीन गुना तक बढ़ गए हैं, जिससे लोगों में नाराजगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में पुलिस बल की मौजूदगी में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।
बेहड़ ने मांग की कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति के दायरे में प्रदेश के सभी ऐसे वन एवं आबादी क्षेत्रों को शामिल किया जाए, जहां के निवासियों को अब तक मालिकाना हक नहीं मिला है, ताकि उन्हें भविष्य में किसी प्रकार की बेदखली की आशंका का सामना न करना पड़े।


