शोभायात्रा, पूजन और समाज सेवा के साथ मनाई जाती है जयंती,अग्रवाल समाज की एकता और गौरव का पर्व
न्यूज प्रिंट रुद्रपुर । महाराजा अग्रसेन जयंती केवल एक महापुरुष की जयंती मनाने का अवसर नहीं, बल्कि समाज में समानता, भाईचारे, अहिंसा और परोपकार की भावना को मजबूत करने का पर्व भी है। अग्रवाल समाज के संस्थापक के रूप में पूजनीय महाराजा अग्रसेन जी के विचार आज भी सामाजिक एकता और जनकल्याण की प्रेरणा देते हैं। हर वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को उनकी जयंती मनाई जाती है, जो शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन पड़ती है।

समाजवाद और सहयोग की मिसाल है ‘एक ईंट, एक रुपया’ का सिद्धांतमहाराजा अग्रसेन जी के साथ जुड़ा ‘एक ईंट और एक रुपया’ का सिद्धांत सामाजिक सहयोग और आत्मनिर्भरता का प्रतीक माना जाता है। इस परंपरा के अनुसार, समाज में आने वाले जरूरतमंद परिवार को प्रत्येक परिवार एक ईंट और एक रुपया देकर अपना नया जीवन शुरू करने में सहयोग करता था। इस विचार का उद्देश्य जरूरतमंदों को आर्थिक सहायता देना और समाज में परस्पर सहयोग की भावना को बढ़ावा देना था।अग्रवाल समाज की एकता और गौरव का पर्वमहाराजा अग्रसेन जी को अग्रवाल समाज की परंपरा और संगठन का प्रमुख आधार माना जाता है। मान्यता के अनुसार, उन्होंने समाज को व्यवस्थित करने के लिए 18 गोत्रों की परंपरा स्थापित की। अग्रसेन जयंती के अवसर पर समाज के लोग उनके आदर्शों को याद करते हुए सामाजिक एकता, भाईचारे और संगठन को मजबूत करने का संकल्प लेते हैं।अहिंसा और करुणा का दिया संदेशमहाराजा अग्रसेन जी के जीवन से जुड़ी परंपराओं में अहिंसा, दया और करुणा को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने पशुबलि का विरोध करते हुए अहिंसा का मार्ग अपनाने का संदेश दिया। उनके इन आदर्शों को याद कर लोग समाज में शांति, सहिष्णुता और जीवों के प्रति संवेदना का भाव विकसित करने की प्रेरणा लेते हैं।शोभायात्रा, पूजन और समाज सेवा के साथ मनाई जाती है जयंतीमहाराजा अग्रसेन जयंती पर देश के विभिन्न हिस्सों में अग्रवाल समाज की ओर से धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। सुबह प्रभात फेरी और भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है, जिनमें महाराजा अग्रसेन जी की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहती हैं। मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर पूजन-अर्चना तथा महाआरती का आयोजन किया जाता है।इस अवसर पर जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और अन्य आवश्यक सामग्री वितरित करने के साथ रक्तदान शिविर भी लगाए जाते हैं। बच्चों और युवाओं के लिए भाषण, निबंध, प्रश्नोत्तरी तथा सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, ताकि नई पीढ़ी महाराजा अग्रसेन जी के जीवन और विचारों से परिचित हो सके।आज भी प्रासंगिक हैं महाराजा अग्रसेन जी के आदर्शमहाराजा अग्रसेन जयंती का मूल संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर चलना, जरूरतमंदों की सहायता करना और आपसी सद्भाव बनाए रखना है। उनके जीवन से जुड़ी परंपराएं लोगों को सिखाती हैं कि समाज की वास्तविक उन्नति तभी संभव है, जब आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सहयोग मिले और हर व्यक्ति को सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हो।




