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500 करोड़ के बकाया भुगतान को लेकर राइस मिलर्स का कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन, आंदोलन की चेतावनी

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बकाया भुगतान और मंडी शुल्क की मांग को लेकर राइस मिलर्स ने खोला मोर्चा

राइस मिलर्स की सरकार को दो टूक, मांगें पूरी नहीं हुईं तो करेंगे। गर्ग

बबलू पाल न्यूज प्रिंट रुद्रपुर। उत्तराखंड प्रदेश राइस मिलर्स एसोसिएशन के बैनर तले मंगलवार को प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान गर्ग के नेतृत्व में बड़ी संख्या में राइस मिलर्स कलेक्ट्रेट पहुंचे। राइस मिलर्स ने अपनी विभिन्न समस्याओं एवं वर्षों से लंबित भुगतान को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रेषित किया।राइस मिलर्स ने कहा कि वर्ष 2019 से 2025 तक करीब 500 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। इसके चलते राइस मिलर्स को आर्थिक एवं बैंकिंग समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है

। उन्होंने सरकार से लंबित भुगतान तत्काल जारी करने की मांग की।एसोसिएशन ने बताया कि वर्ष 2025-26 का करीब 6 लाख क्विंटल चावल अभी उठान के लिए लंबित है। उन्होंने लंबित चावल का शीघ्र उठान कराने के साथ ही उसका भुगतान भी निर्धारित समयसीमा में कराने की मांग की।मंडी शुल्क की समस्या का भी उठाया मुद्दाराइस मिलर्स ने पूर्व वर्षों के लंबित मंडी शुल्क/प्रतिपूर्ति का भुगतान जल्द कराने की मांग की। साथ ही आगामी धान खरीद सत्र 2026-27 से मंडी शुल्क का भुगतान विभाग द्वारा स्वयं वहन करते हुए संबंधित मंडी समिति को सीधे किए जाने की मांग रखी, ताकि राइस मिलर्स पर अतिरिक्त आर्थिक भार न पड़े।कस्टम मिलिंग चार्ज बढ़ाकर 80 रुपये करने की मांगएसोसिएशन ने कहा कि पिछले करीब 12 वर्षों से कस्टम मिलिंग चार्ज में उचित बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि इस दौरान बिजली, श्रमिक, मशीनरी, रख-रखाव और अन्य संचालन खर्चों में लगातार वृद्धि हुई है। राइस मिलर्स ने वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए कस्टम मिलिंग चार्ज 80 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने की मांग की। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा विपणन वर्ष 2026-27 में राइस मिलर्स के लिए 80 रुपये प्रति क्विंटल कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि निर्धारित किए जाने का भी हवाला दिया।प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान गर्ग ने कहा कि राइस मिलर्स पर पहले से ही भारी कर्ज का बोझ है। वर्षों से भुगतान लंबित होने के कारण कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है। यदि सरकार ने जल्द भुगतान नहीं किया और समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो राइस मिलर्स के सामने रोजी-रोटी के साथ-साथ आर्थिक संकट भी खड़ा हो जाएगा।उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों का शीघ्र एवं समयबद्ध समाधान नहीं होने की स्थिति में प्रदेश के राइस मिलर्स आगामी धान खरीद सत्र 2026-27 के सरकारी अनुबंध करने में असमर्थ रहेंगे और आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।राइस मिलर्स ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं संबंधित उच्चाधिकारियों से सभी मांगों पर प्राथमिकता से कार्रवाई करते हुए लंबित भुगतान जारी कराने और अन्य समस्याओं का शीघ्र समाधान कराने की मांग की। इस दौरान बड़ी संख्या में राइस मिलर्स एवं एसोसिएशन के पदाधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान ज्ञापन देने वालों मेंज्ञापन देने वालो में गगन गर्ग। अमित जिंदल। राजेंद्र गुप्ता। पंकज बंगा, नरेश कंसल देवी शंकर अग्रवाल। पंकज बंगा राजेश बंसल। प्रवेश अग्रवाल। श्याम गर्ग। अजय बंसल। हिमांशु जैन। राजकुमार। सचिन अग्रवाल।

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