केजरीवाल, स्टालिन और आदित्य ठाकरे ने कार्रवाई की आलोचना की, कानूनी मदद की पेशकश
न्यूज प्रिन्ट,नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लेकर पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने का मामला राजनीतिक तूल पकड़ रहा है। विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन और लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा उठाया है।
केजरीवाल ने कार्रवाई को बताया बेतुका
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कार्यकर्ताओं की न्यायिक हिरासत पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, “क्या अपने ही देश में अपना झंडा लहराना अपराध है?” उन्होंने इस कार्रवाई को बेतुका बताया।
स्टालिन ने कानूनी सहायता देने की पेशकश की
डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने भी कार्यकर्ताओं को हिरासत में भेजे जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल किया कि सरकार कितने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेगी और कितने युवाओं की आवाज दबाएगी। स्टालिन ने सौरव दास और आशुतोष रांका को जरूरी कानूनी सहायता देने की पेशकश की।
आदित्य ठाकरे ने भी उठाए सवाल
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने कार्रवाई की आलोचना करते हुए सवाल किया कि तिरंगा पकड़ने पर युवाओं को जेल क्यों भेजा गया। उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों और युवाओं की आवाज से जुड़े मुद्दे को उठाया।
सीजेपी कार्यकर्ताओं की न्यायिक हिरासत के बाद विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाओं से यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। नेताओं ने प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और कार्रवाई के औचित्य पर सवाल उठाए हैं।





