न्यूज प्रिन्ट,रुद्रपुर। निकाय चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए समाजसेवी एवं पूर्व पार्षद सुरेश गौरी को लेकर भाजपा नेताओं द्वारा किए गए बड़े-बड़े दावों पर अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में भाजपा की जिला कार्य समिति की घोषणा में सुरेश गौरी को जिला कार्य समिति सदस्य बनाया गया है, जिसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या यही वह “बड़ा सम्मान” था जिसकी चर्चा पिछले कुछ महीनों से की जा रही थी।
दरअसल, निकाय चुनाव में वार्ड नंबर-1 से भाजपा प्रत्याशी के की ऐतिहासिक जीत दर्ज कराई पवन राना ने शानदार जीत दर्ज की थी। चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी संगठन के लिए भी सक्रिय भूमिका निभाई और भाजपा की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके बाद से ही उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि पार्टी संगठन या सरकार में उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
कुछ समय पूर्व अपने जन्मदिन के अवसर पर आयोजित स्वागत कार्यक्रम में पूर्व विधायक राजेश शुक्ला भी पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान शुक्ला ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि भाजपा में सुरेश गौरी के आने से संगठन को मजबूती मिली है और भविष्य में उन्हें उचित सम्मान मिलेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि आने वाले समय में सुरेश गौरी के लिए “कुछ बड़ा” होने वाला है। यही बयान उस समय राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया था।
अब जब भाजपा जिला कार्य समिति की नई सूची जारी हुई है और उसमें सुरेश गौरी को जिला कार्य समिति सदस्य बनाया गया है, तो विपक्षी खेमे और राजनीतिक जानकार इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जिस तरह के संकेत और दावे किए गए थे, उसके मुकाबले यह जिम्मेदारी अपेक्षाकृत छोटी दिखाई देती है। कई लोगों का मानना है कि पार्टी ने बड़े पद की उम्मीद लगाए बैठे कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करने के लिए संगठनात्मक जिम्मेदारी देकर मामला शांत करने का प्रयास किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक दल अपने सक्रिय कार्यकर्ताओं को संगठन में जगह देकर उन्हें साधने का प्रयास करते हैं। ऐसे में सुरेश गौरी को जिला कार्य समिति में शामिल किया जाना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि भाजपा समर्थकों का कहना है कि संगठन में कोई भी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होती है और कार्य समिति सदस्य का पद भी पार्टी की निर्णय प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है।
फिलहाल चर्चा इस बात की है कि जिन दावों के साथ सुरेश गौरी को लेकर भविष्य की तस्वीर पेश की गई थी, क्या जिला कार्य समिति सदस्य का पद उन अपेक्षाओं पर खरा उतरता है या नहीं। आने वाले समय में पार्टी संगठन और नेतृत्व सुरेश गौरी को इससे बड़ी जिम्मेदारी देता है या नहीं, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।
शुक्ला ने गोरी के जन्मदिन पर की थी बड़ी घोषणा तो क्या सुरेश गौरी को मिला सिर्फ राजनीतिक झुनझुना?


