
दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता एवं दिल्ली स्थित अधिवक्ता पियूष छाबड़ा द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदनों पर जवाब दे और EPFO/UAN से जुड़े रोजगार संबंधी रिकॉर्ड तथा PAN से जुड़ी वित्तीय जानकारी के कथित बड़े पैमाने पर डेटा उल्लंघन के संबंध में समाधान भी प्रस्तुत करे। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कोमलता भार्गव उपस्थित रहीं, जबकि मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता रुचि कोहली ने बहस की।भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने Piyush Chhabra v. Union of India & Ors. नामक इस जनहित याचिका में यह निर्देश पारित किया। याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है, जिसमें अनुच्छेद 14, 19(1)(g) और 21 के तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया है।याचिका में आरोप लगाया गया है कि निजी सत्यापन संस्थाओं के माध्यम से एक ऐसा अनियमित डिजिटल रोजगार-सत्यापन तंत्र संचालित हो रहा है, जिसमें EPFO और आयकर विभाग के पास उपलब्ध संवेदनशील डेटा को निजी संस्थाओं द्वारा एक्सेस, आपस में जोड़ा और कथित रूप से व्यावसायिक रूप से बेचा जा रहा है। याचिकाकर्ता ने ऐसे व्यावसायिक रूप से विज्ञापित उत्पादों का भी उल्लेख किया है, जिनमें “EPFO Passbook API”, “Form 26AS API” और “Income Tax Return API” शामिल हैं।याचिका में विशेष रूप से यह दावा किया गया है कि कुछ निजी सत्यापन प्रक्रियाओं में केवल PAN और UAN नंबर उपलब्ध कराने पर ही व्यक्ति की पूरी रोजगार संबंधी जानकारी प्राप्त हो जाती है, जबकि इसके लिए न तो OTP, न स्पष्ट सहमति और न ही पहचान का पर्याप्त सत्यापन किया जाता है।सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब केंद्र सरकार को याचिकाकर्ता के अभ्यावेदनों पर विचार कर अपना जवाब देना होगा और कथित डेटा उल्लंघन को रोकने तथा नागरिकों के संवेदनशील रोजगार एवं वित्तीय डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तावित समाधान अदालत के समक्ष रखना होगा।


